बुधवार, 28 जून 2017
रविवार, 18 जून 2017
Father's day
Ek pedh jo
Beprwah khada tha
dhoop ki chinta se door
Jid me magroor
Ghonsale ki parwah me
Wo bas khada tha
एक पेड़ जो
बेपरवाह खड़ा था
धूप की चिंता से दूर
ज़िद में मगरूर
घोंसले की परवाह में
वो बस खड़ा था
मन कुमार ( मनोज कुमार)
शुक्रवार, 9 जून 2017
Meri maati (मेरी माटी)
एक माटी भीगे क्यों है
कोई माली सींचे क्यों है
गीली ज़मीन तर बतर
मन इस कदर क्यों है
भीगता नहीं दिल
इस कदर गेरूआ क्यों है
छूटता नहीं रंग
अंग-ढंग फूहड़ सा क्यों है
लंबा सफर ख्वाब का
करवट का मोड़ इतना छोटा क्यों है
बड़ा रास्ता छोटा वास्ता
घर छिटक कर
दूर जाता क्यों है
इस बड़ी सी दुनिया में
मेरी माटी भीगे क्यों है
मन कुमार (मनोज कुमार)
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